प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात 2025 – भारत-चीन रिश्तों का नया अध्याय

परिचय: 7 साल बाद मुलाकात क्यों खास?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यह मुलाकात
31 अगस्त 2025 को चीन के तियानजिन में
SCO Summit 2025 के दौरान होगी। यह ऐतिहासिक बैठक इसलिए खास है क्योंकि यह
7 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली चीन यात्रा होगी।
इस मुलाकात से India-China Relations, व्यापार, सीमा विवाद और क्षेत्रीय स्थिरता पर
नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
SCO Summit 2025: मंच और महत्व
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का 25वां शिखर सम्मेलन
31 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक तियानजिन में होगा।
इसमें 20 से अधिक विश्व नेता शामिल होंगे जिनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन,
उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन, और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी होंगे।
भारत 2017 से SCO का सदस्य है और 2022-23 में इसकी अध्यक्षता भी कर चुका है।
द्विपक्षीय मुलाकातें और मुख्य तारीखें
मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय मुलाकात
31 अगस्त 2025 को तय है। इसके अलावा,
1 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात रूसी राष्ट्रपति पुतिन से भी होगी।
इससे पहले, 19 अगस्त 2025 को चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भारत का दौरा किया था,
जहां दोनों देशों ने सीमा और व्यापार पर सहमति बनाई।
India-China Border Dispute: हालिया प्रगति
2020 गलवान घाटी संघर्ष के बाद तनावग्रस्त रिश्तों में अब सुधार दिख रहा है।
हाल ही में देपसांग और डेमचोक क्षेत्र में गश्त पर सहमति बनी है।
सीमावर्ती व्यापार भी फिर से शुरू करने की योजना है।
India-China Trade 2025: आर्थिक सुधार
दोनों देशों ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं,
दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति और टूरिज्म को बढ़ावा देने पर जोर दिया है।
लिपुलेख पास (उत्तराखंड), शिपकी ला (हिमाचल) और नाथू ला (सिक्किम) से सीमावर्ती व्यापार की बहाली की जाएगी।
इसके अलावा मानसरोवर यात्रा और नई उड़ानों पर भी विचार हो रहा है।
भूराजनीतिक संदर्भ और चुनौतियां
यह मुलाकात उस समय हो रही है जब अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर भारी टैरिफ लगाया है।
ऐसे में भारत के लिए China और Russia के साथ संबंध संतुलित करना रणनीतिक रूप से अहम है।
हालांकि, पूर्वी लद्दाख में पूर्ण विसैन्यीकरण और
पाकिस्तान को चीन की सहायता अभी भी चिंता के विषय हैं।
अपेक्षित परिणाम और भविष्य
- सीमा विवाद में सुधार और विश्वास बहाली
- द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि
- ऊर्जा और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग
- पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में तेजी
निष्कर्ष
31 अगस्त 2025 की यह मुलाकात
भारत-चीन संबंधों में नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बैठक न सिर्फ द्विपक्षीय बल्कि पूरे एशिया की शांति और स्थिरता के लिए
टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है।