मथुरा-वृंदावन में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व के उपलक्ष्य भक्तों की भक्ति देखते ही बनती है । इस बार करीब 25 लाख श्रद्धालु वृंदावन में दर्शन, पूजा और उत्सव के लिए इकट्ठा हुए हैं। ऐतिहासिक बांके बिहारी मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी लंबी कतारें सजीं हुई हैं। इसे देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के खास इंतजाम किए हैं, जिससे हर भक्त बिना किसी परेशानी के इस शुभ पर्व का आनंद उठा सके।

मध्यरात्रि कृष्ण जन्म का अद्भुत क्षण
मध्यरात्रि पश्चात जैसे ही घंटी बजती है, मंदिर में मंत्रोचारण एवं कीर्तन की गूंज उठ पड़ती है l इसी शुभ क्षण भगवान श्रीकृष्ण का जन्म होता है (निशीथ पूजा मुहूर्त , लगभग 12:03-12:47AM)। इस प्रमुख पूजा में लड्डू गोपाल को सुंदर झूले में विराजमान कर झूला झुलाया जाता है, भक्तजन श्री कृष्ण जन्म की लोरियाँ और पुराणों की कथाएँ सुनते हैं। जन्मभूमि मंदिर में ठाकुरजी के लिए विशेष सात रंगों की खास पोशाक खास तैयार की गई है, जिसे मथुरा के कारीगरों ने छह माह में बुनकर सजाया है।
वृंदावन की भव्यता: आपरेशन सिंदूर थीम से सजाया गया है प्रेम मंदिर
इस बार वृंदावन में प्रेम मंदिर को ऑपरेशन सिंदूर की तर्ज पर कोलकाता और बेंगलुरु से लाए गए फूलों से अल्तारों को सजाया गया है। चारों ओर फूलों से सजाई गयी खूबसूरती मंत्रमुग्ध कर देती हैl ठाकुर जी फूलों की झांकी में बैठकर लाखों भक्तों को दर्शन देते हुए प्रकट होते है।

वृंदावन में भक्तों के लिए किये गए है विशेष इंतजाम, देश-विदेश से दर्शक कर सकेंगे लाइव दर्शन
इस बार मथुरा-वृंदावन में करीब 40-50 लाख तीर्थयात्री पहुँचने की उम्मीद है। इसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा व यातायात के लिए व्यापक प्रबंध किए हैं l देश-विदेश में रहने वाले भक्तों के लिए ISKCON जैसे बड़े संस्थान ने लाइव दर्शन,और रात्रि आरती की ऑनलाइन सुविधा भी चालू की हैं, जिससे हर कोई इस उत्सव का हिस्सा बन सके।