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धनतेरस 2025: पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व

On: October 18, 2025 11:34 AM
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धनतेरस 2025
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धनतेरस, जिसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है, दीपावली पर्व का पहला दिन होता है। यह दिन धन, स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा की जाती है। साल 2025 में धनतेरस 18 अक्टूबर शनिवार को पूरे देशभर में धूमधाम से मनाई जाएगी। इस दिन शुभ मुहूर्त में पूजा और खरीदारी करने का विशेष महत्व होता है।

धनतेरस 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 18 अक्टूबर (शनिवार) को दोपहर 12:20 बजे से प्रारंभ होकर 19 अक्टूबर (रविवार) दोपहर 1:52 बजे तक रहेगी। प्रदोष काल में पूजा को सर्वोत्तम माना गया है।

  • धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 7:16 बजे से रात 8:20 बजे तक
  • अमृत काल खरीदारी मुहूर्त: सुबह 8:50 से 10:33 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:01 से 12:48 बजे तक
  • गोधूलि बेला: शाम 5:48 से 6:14 बजे तक

धनतेरस का धार्मिक महत्व

धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण यह दिन “धन्वंतरि जयंती” के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा करने से घर में धन, सौभाग्य और समृद्धि स्थायी होती है।

धनतेरस पूजा विधि (Puja Vidhi 2025)

  1. प्रातः स्नान के बाद घर की साफ-सफाई कर दरवाजे पर रंगोली बनाएं।
  2. सायंकाल प्रदोष काल में भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर जी की मूर्तियों की स्थापना करें।
  3. दीप जलाकर अक्षत, फूल, मिठाई और जल अर्पित करें।
  4. 13 दीपक जलाएं — ये दीप यमराज के नाम पर भी जलाए जाते हैं।
  5. धनतेरस मंत्र “ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं धनेश्वर्यै नमः” और लक्ष्मी मंत्र “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः” का जाप करें।
  6. कुबेर जी की आरती कर धन की देवी मां लक्ष्मी से समृद्धि की प्रार्थना करें।

क्या खरीदें धनतेरस के दिन?

धनतेरस पर धातु की वस्तुएं जैसे सोना, चांदी, तांबा और पीतल खरीदना शुभ माना जाता है। इसके अलावा बर्तन, झाड़ू, इलेक्ट्रॉनिक सामान, वाहन या नई संपत्ति खरीदना अत्यंत शुभ फलदायक होता है।

धनतेरस की पौराणिक कथा

कथाओं के अनुसार राजा हिम के पुत्र की मृत्यु उसके विवाह के चौथे दिन सांप काटने से होनी तय थी। उसकी पत्नी ने चौथे दिन घर को दीपों से सजाया और अपने पति को जागते रखा। जब यमराज सांप का रूप लेकर आए, तो दीपकों की रोशनी और आभूषणों के तेज से भ्रमित होकर लौट गए। तभी से दीपदान की परंपरा शुरू हुई और धनतेरस का त्योहार स्थापित हुआ।

स्वास्थ्य और आयुर्वेद का संदेश

धनतेरस भगवान धन्वंतरि का जन्म दिवस है। इसलिए यह दिन आयुर्वेद, स्वस्थ जीवन और प्राकृतिक औषधियों के महत्व को दर्शाता है। इस दिन औषधीय पौधे या जड़ी-बूटियां खरीदना शुभ होता है।

धनतेरस का सांस्कृतिक महत्व

धनतेरस केवल सोना-चांदी खरीदने का पर्व नहीं, बल्कि यह जीवन में प्रकाश, स्वास्थ्य और स्थायी सुख का प्रतीक है। इस दिन के पीछे संदेश यह है कि असली धन स्वास्थ्य और स्नेह में निहित है, केवल भौतिक संपत्ति में नहीं।

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