दीपावली या दिवाली, भारत का सबसे बड़ा और प्रमुख त्योहार है जो प्रकाश, समृद्धि और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। यह पर्व अंधकार पर प्रकाश और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का उत्सव है।
दीपावली 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास की अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर 2025 दोपहर 3:44 बजे से शुरू होकर 21 अक्टूबर 2025 शाम 5:55 बजे तक रहेगी। चूंकि अमावस्या की तिथि प्रदोष काल में 20 अक्टूबर को विद्यमान है, इसलिए इस दिन दीपावली मनाई जाएगी।
- लक्ष्मी गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त: 20 अक्टूबर 2025 शाम 6:56 बजे से रात 8:04 बजे तक
- विशेष योग: वृषभ लग्न का संयोग – लक्ष्मी पूजन के लिए अत्यंत शुभ।
दीपावली का महत्व
दीवाली केवल धार्मिक पर्व नहीं है; यह अंधकार से प्रकाश की, बुराई पर अच्छाई की और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक है। इसी दिन भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूर्ण कर अयोध्या लौटे थे और नगरवासियों ने दीप प्रज्वलित कर उनका स्वागत किया था।
दीवाली आत्मिक शुद्धि, सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है जो हमें अंदर और बाहर दोनों रूपों में प्रकाशित करती है।
लक्ष्मी गणेश पूजा विधि
दीपावली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा से सुख-समृद्धि, धनवृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। पूजा विधि इस प्रकार है:
- प्रातः स्नान कर घर की सफाई करें और दरवाजे पर रंगोली बनाएं।
- पूजा स्थल पर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देव की मूर्तियां स्थापित करें।
- लाल वस्त्र, अक्षत, पुष्प, मिठाई और धूप अर्पित करें।
- दीपक जलाएं और “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जप करें।
- 13 दीपक जलाएं — एक दीपक यमराज के नाम पर घर के बाहर दक्षिण दिशा में रखें।
- पूजा के बाद लक्ष्मी-गणेश की आरती करें और घर में दीपक जलाएं।
दिवाली पर क्या करें और क्या न करें
करें:
- सोना, चांदी या धातु की वस्तुएँ खरीदें।
- मिट्टी के दीपक जलाएं और घर में खुशबूदार फूलों का प्रयोग करें।
- जरूरतमंदों को भोजन या वस्त्र दान करें।
न करें:
- किसी प्रकार का झगड़ा या नकारात्मक कार्य न करें।
- रात में कचरा बाहर न फेंकें।
- लक्ष्मी जी के स्थान पर जूते-चप्पल का प्रयोग न करें।
दीवाली का सांस्कृतिक पहलू
दीवाली न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। भारत ही नहीं, नेपाल, श्रीलंका, मलेशिया और इंडोनेशिया में भी भारतीय मूल के लोग इसे मनाते हैं। व्यापारिक वर्ग इस दिन “चोपड़ा पूजन” कर नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत करते हैं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से दिवाली
दीपक जलाने से वातावरण में नेगेटिव आयन कम होते हैं जिससे वायु शुद्ध रहती है। यह मौसम परिवर्तन के दौरान संक्रमणों से बचाव में भी सहायक है। दीपों की रोशनी मन को सकारात्मक ऊर्जा देती है।
दिवाली और पाँच दिवसीय पर्व श्रृंखला
- धनतेरस (18 अक्टूबर 2025): स्वास्थ्य और धन के देवता धन्वंतरि की पूजा।
- नरक चतुर्दशी (19 अक्टूबर 2025): पाप और नकारात्मकता के नाश का दिन।
- लक्ष्मी पूजन (20 अक्टूबर 2025): समृद्धि और शुभता का मुख्य पर्व।
- गोवर्धन पूजा (21 अक्टूबर 2025): श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की स्मृति।
- भाई दूज (22 अक्टूबर 2025): भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक।
दिवाली का ऐतिहासिक और पौराणिक संदर्भ
रामायण काल में श्रीराम के अयोध्या लौटने के प्रसंग के अलावा, महाभारत में भी दिवाली का उल्लेख है। पांडवों के वनवास से लौटने पर हस्तिनापुर में दीप जलाए गए थे। जैन धर्म में यह दिन भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है।
निष्कर्ष
दीवाली 2025 केवल रोशनी का नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागृति और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व है। इस दिवाली का संदेश है — “अंधकार से प्रकाश की ओर, नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर।” मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर जी की कृपा से आपका घर धन, स्वास्थ्य और खुशियों से परिपूर्ण हो।
© 2025 expresskhabar24.com | सर्वाधिकार सुरक्षित








