प्रशांत किशोर भारत के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक रणनीतिकारों में से एक हैं, जिन्होंने भारतीय राजनीति को नए आयाम दिए। अपने अनुभव, जनसंवाद और रणनीति के दम पर उन्होंने राजनीति को पेशेवर और जनकेंद्रित रूप देने की दिशा में ऐतिहासिक योगदान दिया है।
प्रशांत किशोर का परिचय और पृष्ठभूमि
प्रशांत किशोर का जन्म 20 Mar 1977 को बिहार के रोहतास जिले के कोनार गांव में हुआ था। उनके पिता डॉक्टर श्रीकांत पांडे और माता सुशीला पांडे गृहिणी थीं। उन्होंने बक्सर से अपनी स्कूली शिक्षा प्राप्त की और संयुक्त राष्ट्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम में लगभग आठ वर्षों तक कार्य किया। इसके बाद उन्होंने भारतीय राजनीति में कदम रखा और कई राष्ट्रीय व क्षेत्रीय दलों के लिए चुनावी रणनीति तैयार की।
प्रशांत किशोर का राजनीतिक इतिहास और योगदान
प्रशांत किशोर की राजनीतिक यात्रा वर्ष 2011 में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए चुनावी प्रचार अभियान से शुरू हुई। उन्होंने “सिटिज़न्स फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस” (CAG) नामक संगठन बनाया जिसने 2014 के आम चुनाव में भाजपा की जीत में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस, जेडीयू, वाईएसआरसीपी, आप, टीएमसी और डीएमके जैसे दलों के साथ काम किया।
जन सुराज आंदोलन: प्रशांत किशोर की नई राजनीति
2022 के बाद प्रशांत किशोर ने “जन सुराज आंदोलन” शुरू किया — यह आंदोलन जनता के सुशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर केंद्रित है। 2 अक्टूबर 2024 को गांधी जयंती के अवसर पर उन्होंने “जन सुराज पार्टी” की स्थापना की, जो बिहार की राजनीति में नई दिशा देने का दावा करती है।
जन सुराज पार्टी का घोषणापत्र “शिक्षा, सुशासन और रोजगार” पर आधारित है। पार्टी ने बिहार के 243 विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारे हैं और घोषणा की है कि यदि सरकार बनी तो 100 सबसे भ्रष्ट नेताओं और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रशांत किशोर और बिहार चुनाव 2025 की रणनीति
बिहार चुनाव 2025 में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी एक सशक्त विकल्प बनकर उभरी है। उन्होंने स्वयं चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय लिया है और पार्टी के संगठन व प्रचार पर ध्यान केंद्रित किया है। उनका दावा है कि यदि जन सुराज 150 से कम सीटें जीतता है तो यह उनकी व्यक्तिगत हार मानी जाएगी।
हाल में कुछ उम्मीदवारों के मैदान छोड़ने के बावजूद प्रशांत किशोर ने स्पष्ट कहा कि पार्टी 240 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और संगठन में कोई निराशा नहीं है। उन्होंने एनडीए (BJP, JDU) पर अपने उम्मीदवारों को धमकाने और राजनीतिक दबाव डालने का आरोप लगाया है।
जन सुराज पार्टी के प्रमुख मुद्दे
- शिक्षा व्यवस्था: मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सभी के लिए।
- स्वास्थ्य सेवा: ग्रामीण और गरीब इलाकों में चिकित्सा सुविधा का विस्तार।
- रोजगार सृजन: युवाओं के लिए स्थानीय रोजगार के अवसर।
- भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन: ई-गवर्नेंस और पारदर्शिता को बढ़ावा।
- जन नेतृत्व: जनता को नीति निर्माण में सीधा भागीदार बनाना।
बिहार चुनाव 2025 में प्रशांत किशोर और जन सुराज का प्रभाव
बिहार चुनाव 2025 में एनडीए, महागठबंधन और जन सुराज के बीच त्रिकोणीय मुकाबला बन गया है। प्रशांत किशोर ने राज्य की राजनीति में जातिवाद और परिवारवाद से हटकर “जनता की सरकार” की नई सोच पेश की है। वे सोशल मीडिया, जन संवाद और पदयात्राओं के जरिए लोगों तक अपनी बात पहुंचा रहे हैं।
निष्कर्ष
प्रशांत किशोर की यात्रा संयुक्त राष्ट्र से लेकर भारत के शीर्ष राजनीतिक रणनीतिकार, सामाजिक सुधारक और अब एक प्रभावशाली जन नेता तक पहुंच चुकी है। उनका जन सुराज आंदोलन केवल राजनीतिक अभियान नहीं, बल्कि बदलाव की एक सशक्त शुरुआत है। बिहार चुनाव 2025 में प्रशांत किशोर का यह प्रयास जनता को पारदर्शिता, शिक्षा और सुशासन की नई उम्मीद देता है।






