बिहार चुनाव 2025 का दूसरा और अंतिम चरण राज्य की राजनीति में बेहद निर्णायक साबित हो रहा है। इस चरण में सत्ता के समीकरण, जातिगत गणित और नए राजनीतिक विकल्पों की परीक्षा एक साथ हो रही है। 11 नवंबर को हुए मतदान में 3.7 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने 1,302 प्रत्याशियों की किस्मत EVM में बंद कर दी।
बिहार चुनाव 2025 का संक्षिप्त परिचय
दूसरे चरण में 20 जिलों की 122 सीटों पर मतदान हुआ। सीमांचल, मिथिलांचल, मगध और कोशी अंचल के क्षेत्रीय समीकरण इस फेज को सबसे अहम बनाते हैं। यही चरण सत्ता के लिए निर्णायक माना जा रहा है क्योंकि यहां मतदाताओं की विविधता और मुद्दों की गहराई दोनों ही सबसे ज्यादा हैं।
दूसरे चरण की प्रमुख सीटें और उम्मीदवार
गया, नवादा, जमुई, भागलपुर, पूर्णिया, पश्चिम चंपारण, सुपौल, किशनगंज, सीतामढ़ी जैसी हाई-प्रोफाइल सीटों पर बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। सीमांचल क्षेत्र में चुनाव जाति, धर्म और सामाजिक समीकरणों के हिसाब से जटिल बन गया है। भाजपा, जेडीयू, राजद, कांग्रेस, वाम दल, जन सुराज और अन्य क्षेत्रीय दलों के बीच कड़ा मुकाबला है।
प्रथम चरण की तुलना और मतदान रुझान
पहले चरण में 65% मतदान दर्ज हुआ था, जो एक नया रिकॉर्ड रहा। दूसरे चरण में भी महिलाओं और युवाओं की भागीदारी प्रभावशाली रही है। सीमांचल बेल्ट में 63-65% तक वोटिंग प्रतिशत दर्ज किया गया है, जो बदलाव का संकेत देता है।
बिहार चुनाव 2025 के प्रमुख मुद्दे
- रोजगार: युवाओं ने रोजगार नीति को इस बार मुख्य चुनावी एजेंडा बना दिया है।
- महिला सशक्तिकरण: महिला मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी सामाजिक बदलाव की ओर संकेत कर रही है।
- शिक्षा और स्वास्थ्य: दोनों ही मुद्दों पर जनता ने राजनीतिक दलों से ठोस योजनाओं की मांग की है।
- भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था: दोनों गठबंधन—NDA और महागठबंधन—ने एक-दूसरे के शासनकाल पर सवाल उठाए हैं।
- जन सुराज की एंट्री: प्रशांत किशोर के नेतृत्व में जन सुराज पार्टी स्थानीय मुद्दों और सुशासन के एजेंडे के साथ मैदान में है।
राजनीतिक समीकरण और गठबंधन
NDA (BJP, JDU, HAM, LJP-R): विकास, सामाजिक सुरक्षा और मोदी फैक्टर पर केंद्रित।
महागठबंधन (राजद, कांग्रेस, वाम दल, VIP): बेरोजगारी, आरक्षण और शिक्षा सुधार को मुद्दा बना रहा है।
जन सुराज: प्रशांत किशोर के नेतृत्व में भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन और रोजगार-केंद्रित राजनीति की बात कर रहा है।
वोटर टर्नआउट और नए ट्रेंड
दूसरे चरण में औसतन 58-60% वोटिंग दर्ज हुई है। सीमांचल, मिथिलांचल और मगध क्षेत्र में महिलाओं और युवाओं की सक्रियता ने राजनीतिक संतुलन बदल दिया है। मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग फैक्टर के साथ जन सुराज की बढ़ती लोकप्रियता इस बार चुनाव को त्रिकोणीय बना रही है।
निष्कर्ष: बिहार चुनाव 2025 का निर्णायक मोड़
बिहार चुनाव 2025 का दूसरा चरण केवल वोटों का नहीं, बल्कि राजनीतिक परिवर्तन का संकेत है। युवाओं, महिलाओं और आम जनता की प्राथमिकताओं ने इस बार जाति और धर्म के पारंपरिक समीकरणों को चुनौती दी है। 14 नवंबर को आने वाले नतीजे यह तय करेंगे कि बिहार विकास और सुशासन की राह पर आगे बढ़ेगा या पुराने राजनीतिक ढांचे में उलझा रहेगा।






