1. ब्रेकिंग: राष्ट्रपति पुतिन का भारत दौरा और PM मोदी के साथ ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन
ताज़ा अपडेट (4 दिसंबर 2025): रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन (23rd India-Russia Annual Summit) के लिए आज नई दिल्ली पहुंच रहे हैं। यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद यह पुतिन की पहली भारत यात्रा है, जो वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आज शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने आवास पर राष्ट्रपति पुतिन के लिए एक ‘प्राइवेट डिनर’ की मेजबानी करेंगे, जिससे दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत और रणनीतिक संबंधों की मजबूती का संकेत मिलता है।
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया की निगाहें भारत की “संतुलन की नीति” (Balancing Act) पर टिकी हैं। एक तरफ अमेरिका और पश्चिमी देशों का दबाव है, तो दूसरी तरफ रूस के साथ भारत की दशकों पुरानी “विशेष और विशेषाधिकृत रणनीतिक साझेदारी” (Special and Privileged Strategic Partnership)।
2. इस दौरे का मुख्य एजेंडा: डिफेंस, ट्रेड और एनर्जी
इस शिखर सम्मेलन में कई बड़े समझौतों पर मुहर लगने की उम्मीद है। आइए जानते हैं किन 3 प्रमुख मुद्दों पर सबसे ज्यादा फोकस रहेगा:
अ. रक्षा सहयोग और RELOS समझौता (Defense & RELOS)
सबसे बड़ी खबर RELOS (Reciprocal Exchange of Logistics Agreement) को लेकर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूसी संसद ने इस समझौते को मंजूरी दे दी है। इसके तहत:
- दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों और बंदरगाहों का इस्तेमाल लॉजिस्टिक्स और री-फ्यूलिंग (ईंधन भरने) के लिए कर सकेंगी।
- S-400 मिसाइल सिस्टम की बाकी बची दो रेजिमेंट्स की डिलीवरी में तेजी लाने पर भी बात होगी।
- भारत के सुखोई-30 MKI फाइटर जेट्स के अपग्रेडेशन और भविष्य के S-500 एयर डिफेंस सिस्टम पर भी चर्चा संभव है।
ब. आर्थिक रोडमैप 2030 (Economic Roadmap 2030)
पश्चिमी प्रतिबंधों (Sanctions) के बीच दोनों देश अपने व्यापार को सुरक्षित करने के लिए एक नया खाका तैयार कर रहे हैं।
- लक्ष्य: 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को संतुलित करना और बढ़ाना।
- पेमेंट सिस्टम: डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए नेशनल करेंसी (रुपये-रूबल) में व्यापार के लिए नए पेमेंट गेटवे पर सहमति बन सकती है।
- लेबर मोबिलिटी: भारत से स्किल्ड वर्कर्स (कुशल कामगारों) को रूस में रोजगार के अवसर देने के लिए एक माइग्रेशन एग्रीमेंट भी एजेंडे में है।
स. ऊर्जा और परमाणु सहयोग (Energy & Nuclear Deals)
- भारत रूस से कच्चे तेल (Crude Oil) का आयात जारी रखेगा, बावजूद इसके कि अमेरिका ने कुछ भारतीय कंपनियों पर टैरिफ लगाए हैं।
- तमिलनाडु के कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Kudankulam Nuclear Power Plant) की नई इकाइयों और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर्स (Small Modular Reactors) के निर्माण पर भी बात आगे बढ़ेगी।
3. भू-राजनीतिक महत्व: भारत का कड़ा संदेश
राष्ट्रपति पुतिन का यह दौरा सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा भू-राजनीतिक संदेश भी है।
- आत्मनिर्भर विदेश नीति: अमेरिका द्वारा हाल ही में लगाए गए टैरिफ और दबाव के बावजूद, भारत ने पुतिन का स्वागत कर यह साफ कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा और ऊर्जा जरूरतों के लिए किसी के दबाव में नहीं आएगा।
- शांति की अपील: उम्मीद है कि पीएम मोदी एक बार फिर “यह युद्ध का युग नहीं है” (This is not an era of war) के अपने संदेश को दोहराएंगे और कूटनीति व बातचीत के जरिए यूक्रेन संघर्ष के समाधान पर जोर देंगे।
4. कल (5 दिसंबर) क्या होगा?
कल का दिन बेहद अहम है। हैदराबाद हाउस में दोनों नेताओं के बीच औपचारिक प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता होगी। इसके बाद:
- संयुक्त बयान (Joint Statement) जारी किया जाएगा।
- कई अहम समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर होंगे।
- राष्ट्रपति पुतिन और पीएम मोदी एक बिजनेस फोरम को भी संबोधित कर सकते हैं।
निष्कर्ष
पीएम मोदी और पुतिन की यह मुलाकात भारत-रूस संबंधों के 75 साल के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ेगी। जहां दुनिया गुटों में बंट रही है, वहीं भारत अपनी शर्तों पर दोस्ती निभा रहा है। RELOS समझौता और 2030 का आर्थिक रोडमैप यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में भी रूस, भारत का एक भरोसेमंद साझीदार बना रहे।








